वियतनाम ने बाक निन प्रांत को सीधे केंद्र के अधीन लाकर एक ऐसी ग्रीन और स्मार्ट सिटी बनाने का फैसला किया है, जहाँ विकास के साथ पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत दोनों को समान महत्व दिया जा रहा है। क्या अब समय आ गया है कि दिल्ली/NCR में भी प्रदूषण और अव्यवस्थित विकास से निपटने के लिए इसी तरह का कोई मॉडल अपनाया जाए?
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| वियतनाम के ग्रीन सिटी मॉडल से क्या दिल्ली-NCR को प्रदूषण और अव्यवस्थित विकास से राहत मिल सकती है? |
आज जब दुनिया के बड़े-बड़े शहर आधुनिकता की अंधी दौड़ में अपने पर्यावरण और संस्कृति को खोते जा रहे हैं, वहीं हमारे पड़ोसी एशियाई देश वियतनाम ने विकास का एक ऐसा मॉडल पेश किया है जो पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन सकता है। वियतनाम सरकार ने अपने तेजी से उभरते हुए औद्योगिक राज्य 'बाक निन' (Bac Ninh) को सीधे "केंद्र-प्रशासित शहर" (Centrally Governed City) का दर्जा देने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद 'बाक निन' अब वियतनाम का आठवां ऐसा शहर बन गया है जो सीधे देश की केंद्र सरकार की देखरेख और बजट से संचालित होगा। लेकिन यह खबर सिर्फ एक प्रशासनिक फेरबदल भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपा 'मास्टर प्लान' दुनिया भर के नीति-निर्माताओं की आंखें खोलने वाला है।
📱 हाई-टेक भी, 'ग्रीन' भी: यह है भविष्य का शहर
वियतनाम सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, इस नए सुपरसिटी को "स्मार्ट, मॉडर्न और ग्रीन" तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि यहाँ दुनिया भर की बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां और फैक्ट्रियां तो होंगी, लेकिन वे प्रदूषण नहीं फैला सकेंगी। पूरे शहर को डिजिटल और एआई (AI) टेक्नोलॉजी से लैस किया जाएगा, ताकि ट्रैफिक, बिजली और पानी का मैनेजमेंट इंसानी दखल के बिना स्मार्ट तरीके से हो सके।
🏛️ संस्कृति से कोई समझौता नहीं
इस प्रोजेक्ट की सबसे खूबसूरत बात यह है कि वियतनाम सरकार ने साफ कर दिया है कि आधुनिक शहर बनने का मतलब यह कतई नहीं है कि इतिहास को भुला दिया जाए। 'बाक निन' को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि उसकी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक इमारतें और पारंपरिक मूल्य पूरी तरह सुरक्षित रहें। यानी एक तरफ गगनचुंबी इमारतें और बुलेट ट्रेन होंगी, तो दूसरी तरफ उनकी संस्कृति की जड़ें भी मजबूत रहेंगी।
🇮🇳 भारत और हमारे शहरों के लिए क्या है इसमें सबक?
'दिल्ली क्राइम प्रेस' के इस विशेष विश्लेषण में यह सवाल उठाना बेहद जरूरी है कि जो काम वियतनाम कर रहा है, क्या उसकी जरूरत आज भारत के दिल्ली-एनसीआर, मुंबई या बेंगलुरु जैसे महानगरों को नहीं है? आज हमारे शहर प्रदूषण, बेतरतीब निर्माण और ट्रैफिक जाम से हांफ रहे हैं। वियतनाम का 'बाक निन' मॉडल हमें सिखाता है कि अगर सरकार की नीयत साफ हो और प्लानिंग सही हो, तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना भी देश को आर्थिक महाशक्ति बनाया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से वियतनाम में विदेशी निवेश (Foreign Investment) की बाढ़ आने वाली है, जो आने वाले समय में वैश्विक व्यापार के समीकरण बदल देगा। अब देखना यह है कि दुनिया के अन्य विकासशील देश वियतनाम के इस 'स्मार्ट और ग्रीन' फॉर्मूले से क्या सीख लेते हैं।
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