पुलिस की एक टाइपिंग मिस्टेक और मर्डर की आरोपी को मिली जमानत!

🚨 BREAKING NEWS: दिल्ली क्राइम प्रेस विशेष रिपोर्ट

मेघालय हनीमून मर्डर केस में बड़ा मोड़; हत्या की धारा 103 की जगह पुलिस ने कागजों में लिख दी 'नॉन-एक्जिस्टेंट' धारा 403, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर जताई हैरानी।


📍 विशेष प्रतिनिधि, दिल्ली (2026):

कानून की किताब में एक मामूली सा अक्षर या नंबर कैसे पूरे मर्डर केस की दिशा बदल सकता है, इसका एक हैरान कर देने वाला मामला देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) तक पहुंच गया है। मेघालय में हुए चर्चित "हनीमून मर्डर केस" की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को सिर्फ पुलिस की एक अदद टाइपिंग की गलती (Typographical Error) के कारण हाई कोर्ट से जमानत मिल गई. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस तकनीकी चूक पर गंभीर रुख अपनाया है.

क्या था पूरा मामला? (The Background)

इंदौर की रहने वाली सोनम रघुवंशी और ट्रांसपोर्ट व्यवसायी राजा रघुवंशी की शादी मई 2025 में हुई थी. शादी के तुरंत बाद दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए. पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, सोनम का राज कुशवाहा नामक युवक के साथ अवैध संबंध था. अपने प्रेमी और अन्य तीन साथियों के साथ मिलकर सोनम ने पति को रास्ते से हटाने की एक खौफनाक साजिश रची. 23 मई 2025 को मेघालय की सुनसान वादियों में राजा की हत्या कर उसकी लाश को वेइसावडोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई में फेंक दिया गया. 10 दिनों की कड़ी मशक्कत और ड्रोन कैमरों की मदद से पुलिस ने खाई से सड़ी-गली लाश बरामद की थी.

लापरवाही का खेल: 103 बन गया 403

मेघालय पुलिस ने केस तो मजबूती से खड़ा किया और 700 से अधिक पन्नों की चार्जशीट भी दाखिल की, लेकिन अरेस्ट मेमो और मुख्य दस्तावेजों को तैयार करते समय एक भारी लापरवाही हो गई.

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत हत्या के लिए तय की गई धारा 103(1) की जगह पुलिस ने गलती से धारा 403(1) टाइप कर दिया. आपको बता दें कि नए कानून (BNS) में धारा 403 नाम का कोई प्रावधान ही मौजूद नहीं है.

जब यह मामला हाई कोर्ट पहुंचा, तो आरोपी के वकील ने इसी तकनीकी खामी (Technical Loophole) को अपना हथियार बनाया. हाई कोर्ट ने माना कि बिना दिमाग लगाए (Without Application of Mind) कागजात तैयार किए गए और आरोपी को सही धाराएं नहीं बताई गईं, जिसके आधार पर उसे जमानत दे दी गई.

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

मेघालय सरकार इस फैसले के खिलाफ तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुंची. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में इसे बेहद चौंकाने वाला मामला बताया. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने भी टिप्पणी की कि सिर्फ एक टाइपिंग एरर के कारण इतने गंभीर मामले में जमानत देना हैरान करता है.

हालांकि, चूंकि आरोपी महिला जेल से पहले ही रिहा हो चुकी है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर तुरंत रोक (Stay) लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. फिलहाल सोनम को सख्त शर्तों के साथ शिलोंग में ही रुकने का आदेश है.

दिल्ली क्राइम प्रेस व्यू (Editor's Note):

यह मामला देश की कानून व्यवस्था और पुलिसिंग के लिए एक बहुत बड़ा सबक है। नए कानूनों (BNS) को लेकर पुलिस महकमे में ट्रेनिंग की कमी साफ उजागर होती है। जब जमीनी स्तर पर जांच करने वाले अधिकारी कागजी कार्रवाई में ऐसी बड़ी चूक करेंगे, तो संगीन से संगीन जुर्म करने वाले अपराधी भी कानून की कमियों का फायदा उठाकर सलाखों से बाहर घूमते नजर आएंगे।

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